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बुधवार, 21 अगस्त 2024

सिकिल सैल ऐनिमीया (अर्धचंद्राकार कोशिका रक्ताल्पता ) की पहचान और प्रबंधन

माता पिता से प्राप्त अनुवांशिक आर.बी.सी (लाल रक्त कोशिका) विकार के कारण शिशुओं, बच्चों और वयस्कों में सिकिल सैल ऐनिमीया (अर्धचंद्राकार कोशिका रक्ताल्पता) की समस्या हो जाती है. इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति के रक्त में विद्यमान लाल रक्त कोशिका (आर.बी.सी.), जिसका आकार गोल अंडाकर होता है, परिवर्तित हो कर अर्धचंद्राकार हो जाता है. स्वस्थ्य एवं सामन्य लाल रक्त कोशिका की तुलना में, अस्वस्थ्य लाल रक्त कोशिका चिपचिपी होती हैं.  स्वस्थ लाल रक्त कोशिका (आर.बी.सी.), रक्त के साथ शरीर की रक्त वाहिका में प्रवाहित (बहना) होती हैं जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन पहुँचती है. किन्तु अर्धचंद्राकार लाल रक्त कोशिका, रक्त वाहिका में प्रवाहित (बहना) नहीं हो पाती हैं अत: अंगो तक ऑक्सीजन पहुँचाने का कार्य नहीं कर पाती हैं. आमतौर पर स्वस्थ्य एवं सामान्य लाल रक्त कोशिका का जीवन १२० दिन का होत है किंतु असामान्य लाल रक्त कोशिका का जीव १० से २० दिनों का ही रहता है जिस वजह से शरीर में रक्तताल्पता (रक्त की कमी) होने लगती है.   


सिकिल सैल ऐनिमीया (अर्धचंद्राकार कोशिका रक्ताल्पता के लक्षण : 

भ्रूण में उपस्थित हीमोग्लोबिन (लाल रक्त कोशिका में पाया जाने वाला प्रोटीन अणु) के शिशु के शरीर पर प्रभाव के कारण शिशु के जन्म से कुछ दिनों तक इस समस्या के लक्षण दिखाई नहीं देते किंतु कुछ समय के उपरांत, जैसे ही शिशु के शरीर में भ्रूण में उपस्थित हीमोग्लोबिन का स्थान असमान्य हीमोग्लोबिन ले लेता है, वैसे ही सिकिल सैल ऐनिमीया के लक्षण शिशु में दिखाई देने लगते हैं.  यह लक्षण इस प्रकार हैं:

१.      शिशु का कमज़ोर होना अपेक्षित शारीरिक विकास का नहीं हो पाना.

२.      रक्ताल्पता होना, थकावट महसूस करना. लाल रक्त कोशिका का टूटना. 

३.      हाथ पैर में दर्द होना, सूजन आना तथा छाती में दर्द महसूस करना.

४.      आँखों से साफ नहीं दिखना.

५.      मूत्र की सघनता में कमी होना. शरीर में पानी की कमी होना.

६.      शरीर में बिल्युरुबिन नामक तत्व का बढ़ना जिसके कारण शरीर में पीलापन आना साथ ही संक्रमण होना.

७.      प्लीहा का सामन्य रूप से कार्य नहीं कर पाना.ना. अन्य आंतरिक अंगों का सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाना.


सिकिल सैल ऐनिमिया से बचाव :

रक्ताल्पता से ग्रसित शिशु, बालक, बालिका, यवक, युवती, गर्भवती अथवा धात्री महिला अथवा पुरुष के उपचार के बाद भी यदि स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिले और रक्त चढ़ाने की आवश्यक्ता लगे तो यह समझा जा सकता है कि संभावना है कि ऐसा व्यक्ति, सिकिल सैल रक्तालपता से ग्रसित है.  ऐसे व्यकि की जाँच विकास खंड स्तर पर स्वास्थ्य विभाग मे अस्पताल में करवाई जा सकती है.  

सिकिल सैल रक्ताल्पता से ग्रसित युवक को सिकिल सैल से ग्रसित युवती से विवाह नहीं करना चाहिये अन्यथा संतान भी सिकिल सैल रक्ताल्पता से ग्रसित होगी. 

  

डॉक्टर से इस समय सम्पर्क करें :  

अगर शिशु को तेज़ बुखार, चिड़चिड़ापन, शरीर की त्वचा में पीलापन, तेज साँसें, पेट बाहर की ओर निकलना, हाथ और पैरों में सूजन, कमज़ोरी, बेसुध होने, आंखों में दिक्‍कत होना और दौरे पड़ने की स्थिति में शिशु को तुरंत डॉक्‍टर को दिखायें.


सिकिल सैल रक्ताल्पता में ध्यान देने वाली बातें :     

1.   ठंड से बचें. सिकिल सैल रक्ताल्पता से ग्रसित शिशु, बच्चे अथवा व्यक्ति को ठंड से बचायें. ठंडे मौसम में गर्म कपड़े धारण करवायें ठंडे पानी से स्नान नहीं करायें तथा ठंडे तापमान का तथा ठंडी तासीर के खान- पान का सेवन नहीं करने दें.  इस व्यक्ति को सर्दी, खाँसी और ज़ुखाम से बचायें. तापमान के कम हो जाने से रक्त वाहिका संकुचित हो जाती हैं जिससे सिकिल सैल रक्ताल्पता की समस्या बढ़ सकती है. बहुत अधिक तापमान से भी बचें.  

2.   प्रभावित व्यक्ति को बहुत अधिक मेहनत अथवा कसरत नहीं करनी चाहिये जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आवश्यक्ता बढ़ जाये अन्यथा प्रभावित व्यक्ति को श्वाँस लेने में कठिनाई हो सकती है. थोड़ी शारीरिक गतिविधि वह कर सकता है जिसमें उसकी साँस नहीं फूले.

3.   समुद्र तल से अधिक ऊँचाई पर नहीं जायें जहाँ ऑक्सीजन की कमी होती है अत: श्वाँस फूल सकती है.

4.   पौष्टिक भोजन का सेवन करें, नियमित रूप से पानी पियें. पूरक फोलिक अम्ल की गोली, ५ मिलीग्राम प्रति दिन १० माह तक, ज़िंक की १० मिलीग्राम की गोली प्रति दिन(१ से २महिने) वयस्कता तक सेवन करें. 

5.   ऐसे आहार का सेवन नहीं करें  जिससे शरीर में अम्लता बढ़े जैसे चाय, कॉफी. नशीली वस्तुयें जैसे सिगरैट, बीड़ी, तम्बाकू, भाँग, धतूरा तथा मदिरा .

6.   भोजन में सोडे का उपयोग नहीं करें साथ ही सोडायुक्त पेय पदार्थ का सेवन भी नहीं करें जिससे विटामिन-बी का शरीर में अवशोषण बाधित होगा.

7.   रात के समय चावल, दही, खट्टी खाद्य सामग्री एवं फलों का सेवन नहीं करें.


आहार संबंधी सावधानियाँ :

1.   सिकिल सैल ऐनीमिया से प्रभावित व्यक्ति के लिये  प्रोटीन, ऊर्जा, कैल्शियम, विटामिन-डी, विटामिन-बी कॉम्प्लैक्स, विटामिन-सी, ज़िंक (जस्ता) और कॉपर (ताँबा) महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं जिन्हें आहार अथवा पूर्क पोषक तत्व गोलियों (स्प्लीमैंट) द्वारा ग्रहण करना चाहिये..

2.   प्रतिदिन, उचित समय पर सम्पूर्ण तथा ताज़े आहार का सेवन करें. भोजन में मौसमी एवं स्थानीय खाद्य सामग्री जैसे  सम्पूर्ण अनाज (मैदा तथा मैदे से बनी खाद्य सामग्री का सेवन नहीं करें. ), दाल, मेवे, तिलहन / तिल, रंगबिरंगी सब्ज़ियाँ और फल, गुड़, दूध (हल्दी के साथ) तथा दुग्ध पदार्थ का सेवन करें. खाने में मेथी दाना और मुनगा भी शामिल कर सकते हैं जो कि कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत हैं.

3.   थाली में अधिक से अधिक रंग के व्यंजनों को शामिल करें. घर पर पोषण गृह वाटिका लगायें जिसमें स्थानीय एवं मौसमी, रंगबिरंगी सब्ज़ी और फलदार वृक्ष लगायें और मौसमी और ताज़े फल सब्ज़ी घर पर ही पायें.    

4.   ठंड के दिनों में, स्नान करने के पूर्व शरीर में तेल की मालिश कर के धूप तापें जिससे शरीर में विटामिन – डी का निर्माण  होगा. विटामिन –डी की उपस्थिति में शरीर कैल्शियम को भली-भाँति अवशोषित कर सकेगा. आवश्यक्ता पड़ने पर दर्द निवारक दवाईयों का भी उपयोग कर सक्ते हैं किंतु यह सभी उपचार अच्छे चिकित्सक के देखरेख में ही करें.

5.   ग्रसित व्यकि तथा इस व्यक्ति की देखरेख कर रहे व्यक्ति को सिकिल सैल तथा इसके प्रबंधन विषय के बारे में शिक्षित, जागरुक तथा प्रशिक्षित होना ज़रूरी है.

6.   सिकिल सैल रक्ताल्प्ता ग्रसित व्यक्ति को प्रसन्न्चित्त रहना चाहिये.

7.   सिकिल सैल रक्ताल्प्ता से ग्रसिक व्यक्ति को तनाव से दूर रहना चाहिये.     


आग्रह ; 

कृपया अपने विचार और सुझाव नीचे दिये गये कमैन्ट बॉक्स में अवश्य अंकित कर प्रोत्साहितव 

करें 

सादर 


कृपया ध्यान दें :

उपरोक्त लेख केवल सूचनार्थ है, आवश्यकता पड़ने पर कृपया चिकित्सक से संपर्क करें.

Thank You for writing. Please keep in touch. Avtar Meher Baba Ki Jai Dr. Chandrajiit Singh

मंगलवार, 21 मई 2024

खाने के साथ चाय

🌻🌼🍀🌻🌼☘️
आजकल खाने के साथ कई लोग चाय पीते हैं। किंतु, क्या खाने के साथ चाय पीनी चाहिये ? यदि नहीं, तो खाने से कितनी देर पहले अथवा कितनी देर बाद चाय पी जा सकती है।

मुख्य खाने के साथ चाय का सेवन नहीं करें क्योंकि चाय में 'टैनिन' नामक पोषण विरुद्ध कारक (एन्टी न्यूट्रिशनल फैक्टर) उपस्थित होता है जो कि शरीर में लौह तत्व के अवशोषण को रोकता है जिससे रक्ताल्पता (ऐनिमिया) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। व्यवहारिक तौर पर खाने के आधे घंटे से पहले और आधे घंटे के बाद चाय पी सकते हैं।

आग्रह:
कृपया लेख के बारे में अपने विचार तथा सुझाव दिये गये कमेंट बॉक्स में अंकित करने की कृपा करें, 
सादर 
जय प्रियतम अवतार मेहेरबाबा की जय जय जिनेन्द्र सदा 💐💐

*मेहेर न्यूट्रिशन*
WA: 83193 93727
🍬🍥🍬🍥🍬🍥🍬
*जय प्रियतम अवतार मेहेरबाबा जय जिनेन्द्र सदा*

🙏🏻😇😇🌈🌈🙏🏻
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रविवार, 3 सितंबर 2023

शरीर में रक्त की कमी (ऐनिमिया) नियंत्रण हेतु दैनिक आहार में लौह तत्व (आयरन) की आपूर्ति

लौह तत्व (आयरन) दैनिक आहार का एक महत्वपूर्ण खनिज तत्व है जो रक्त को लालिमा प्रदान (लाल रक्त कणिकाओं के कारण) करता है तथा शरीर के विभिन्न अंगों तक प्राण वायु (ऑक्सीजन) पहुँचाता है जिससे शारीरिक अंग सुचारू रूप से कार्य कर पाने में सक्षम हो पाते हैं. सामन्यत: एक स्वस्थ्य व्यस्क पुरुष के प्रति १०० मिली लीटर (१ डैसीलीटर) रक्त मे १३.५ से १७.५ ग्राम लौह तत्व तथा स्वस्थ्य व्यस्क महिला में प्रति १०० मिली लीटर (१ डैसी लीटर) मे १२.५ से१५.५ ग्राम लौह तत्व विद्यमान होना चाहिये. यदि लौह तत्व की यह मात्रा रक्त में सामान्य स्तर से कम होती है तो इस स्थिति को ऐनीमीया के नाम से जाना जाता है जिसे सामान्य भाषा में खून की कमी के नाम से अथवा रक्ताल्पता के नाम से भी हम जानते हैं.

नैशनल फैमिली ऐंड हैल्थ सर्वे-5 के अनुसार भारत में 72.7 % 5 वर्ष से छोटे बच्चे (6 माह से 59 माह),  लगभग 58.1 % किशोरियाँ (15-19 वर्ष की समस्त किशोरियाँ), 54.7 % महिलायें (15-49 वर्ष की किशोरियाम एवं समस्त महिलायें) एवं 52.9 % गर्भवती महिलायें (15-49 वर्ष की गर्भवती मातायें) रक्ताल्पता से पीड़ित हैं. हिन्दुस्तान टाईम्स की एक रपट के अनुसार मध्यप्रदेश में 80 प्रतिशत जनसंख्या रक्ताल्पता से पीड़ित हैं.

ऐनिमिया (रक्ताल्पता) 

रक्ताल्पता तीन प्रकार की होती है. यह इस प्रकार हैं:

1.      सामान्य रक्ताल्पता: शरीर के रक्त में लाल रक्तकणिकाओं की कमी के कारण होने वाली रक्ताल्पता. 

2.      सिकिल सैल ऐनिमिया (अर्धचन्द्राकार रक्ताल्पता): कोशिका का हँसिया अथवा अर्धचन्द्राकार होने के कारण होने वाली रक्ताल्पता.

3.      मैगलोब्लास्टिक रक्ताल्पता: शरीर में विटामिन-बी की कमी के कारण होने वाली रक्ताल्पता. 

ऐनिमिया (रक्ताल्पता)के कारण:   

लौह तत्व की कमी के कारण इस प्रकार हैं:

1.      आहार में लौह तत्व के स्त्रोतों को आवश्यकता से कम शामिल करना अथवा शामिल नहीं करना.

2.      आहार में विटामिन-सी के स्त्रोतों को आवश्यकता से कम शामिल करना अथवा शामिल नहीं करना.

3.      प्रसव के समय अथवा मासिक धर्म के समय अधिक खून का स्त्राव होना.

4.      शरीर में लौह तत्व का अवशोषण न होना.

5.      शरीर में आंतरिक रक्त का स्त्राव होना.

6.      दर्द के साथ आंतरिक रक्त स्त्राव होना जो कि महिला को पता न लग पाये.

7.      मलेरिया के कारण लाल रक्त कणिकायें शरीर में कम हो जाना

8.      पेट में उपस्थित कृमि के कारण (यह नंगे पाँव चलने के कारण, पाँव के तलवे से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं).

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रक्त में हीमोग्लोबिन की सीमा रेखा निम्नानुसार है:

क्र.

हितग्राही समूह की उम्र

ग्राम प्रति 100 मिली लीटर (1 डैसी लीटर) रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा

सामान्य

 (रक्ताल्पता नहीं)

अल्प रक्ताल्पता

मध्यम रक्ताल्पता

गम्भीर रक्ताल्पता

1.       

11 वर्ष के बराबर अथवा अधिक

10-10.9

7.79

7-7.9

7 से कम

2.       

12 के बराबर अथवा अधिक

11-11.9

8.-10.9

8-10.9

8 से कम

ऐनिमिया (रक्ताल्पता) की पहचान (सामान्य लक्षण):

ऐनिमिया (रक्ताल्पता) की पहचान (सामान्य लक्षण) इस प्रकार हैं :

1.      शरीर में थकावट आना, ऊर्जा की कमी महसूस करना.

2.      चक्कर आना.

3.      वैचारिक अस्पष्टता होना, बातें देर से समझ आना. 4.स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना.

4.      आत्म्विश्वास में कमी होना, मन डूबना, रोने का मन करना. 6. त्वचा पर, आँख के पलकों के भीतर, जीभ के बाहरी किनारों पर लाली की कमी होनी, रंग फीका होना तथा पीलापन आना, जीभ के किनारों का फूलना.

5.      नाखूनों में लाली की कमी तथा पीलापन अथवा सफेदी आना.

6.      नाखूनों का टूटना.

7.      एकग्रता न बन पाना अथवा बार बार एकाग्रता भंग होना.

8.     विद्यार्थीयों का पढ़ाई में अरुचि पैदा होना.   

ऐनिमिया (रक्ताल्पता) की पहचान (गम्भीर लक्षण):

1.      भूख कम लगना. 

2.      पैरों में सूजन होना (इडिमा होना).

3.      कम श्रम में ही साँस फूलना तथा सिरदर्द होना.

4.      हृदय की धड़कन का सामान्य रूप से बढ़ना और घटना.

5.     हाथ पैर में असंवेदंशीलता आना अथवा झुनझुनी आना.

ऐनिमिया (रक्ताल्पता) के नियंत्रण का उपाय:

रक्त की जाँच करवायें (सी.बी.सी. जाँच) और रक्ताल्पता की स्थिति की स्पष्ट जानकारी प्राप्त करें. संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें लौह तत्व और विटामिन-सी के आहारीय स्त्रोतों को प्रमुखतः से शामिल करें.  

लौह तत्व के स्त्रोतों जैसे, बाजरा, जई का दलिया, अंकुरित दलहन, मसूर, सेम, सोयाबीन तथा सोयाबीन से बने खाद्य उत्पाद जैसे, लड्डू, बर्फी, नमकीन, चकली, मठरी, शक्कर पारा, टोफू (सोयाबीन का पनीर), टैम्पेह, गुड़. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (जैसे पालक, मेथी और बथुआ), लाल भाजी, चुकन्दर,तरबूज़ के बीज, लोहे की कड़ाही में बनी सब्ज़ी, अनार,खजूर, काजू, किशमिश तथा अन्य मेवे इत्यादि माँसाहार में अंडा, मछ्ली और माँस, आँगनबाड़ी से मिलने वाली आयरन-फोलिक अम्ल की लाल गोली का सेवन करें.   

विटामिन-सी के स्त्रोतों को आहार में शामिल करें जैसे करौंदा, बेर, संतरा, मौसंबी, नींबू, आँवला,अमरूद, लीची, पपीता ब्रोकली (हरी गोभी), फूल गोभी, अंकुरित गोभी (एक प्रकार की गोभी), हरी एवं लाल मिर्च, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ जैसे पालक, शलजम के पत्ते, आलू एवं शकरकंद इत्यादि, आँगनबाड़ी से मिलने वाली आयरन-फोलिक अम्ल की लाल गोली में विटामिन-सी भी विद्यमान है.   

लौह तत्व के साथ संयोजित होने वाले प्रोटीन के स्त्रोत को आहार में सम्मिलित कर दैनिक रूप से सेवन करें जैसे अनाज जैसे गेहूँ, चावल, ज्वार, मक्का, जौ, जई इत्यादि, दलहन जैसे मूँग,अरहर, चना, उड़द, मसूर इत्यादि तथा सोयाबीन, दुग्धाहार जैसे दूध, पनीर एवं छेना, माँसाहार जैसे अंडा, लाल माँस इत्यादि प्रोटीन सप्लीमैंट भी बाज़ार में उपलब्ध हैं जिनके सेवन द्वारा शरीर को प्रोटीन उपलब्ध होता है.   

कृपया ध्यान दें:

1.      चूँकि चाय में टैनिन नाम का रसायन विद्यमान होता है जो कि भोजन में उपस्थित लौह तत्व को बाँध देता है तथा मनुष्य, आहार से लौह तत्व को अवशोषित नहीं कर पाता है इसलिये भोजन ग्रहण करने के एक घंटे पूर्व तथा 1 घंटे बाद ही चाय का सेवन करें.

2.      यदि कैल्शियम और लौह तत्व के सप्लीमैंट (पूरक गोलियाँ) का सेवन करना हो तो दोनों के बीच  में कम से कम 2 घंटे का अंतराल होना चाहिये.

 

Thank You for writing. Please keep in touch. Avatar Meher Baba Ki Jai - Dr. Kinjulck C. Singh Dr. Chandrajiit Singh