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इस आर्कटिकल के ज़रिये, आईये हम जानते हैं कि:
1.क्यों पोषक तत्वों के साथ विपोषक तत्वों के बारे में भी हमें पता होना चाहिये। हमें यह जानना चाहिये कि विपोषक तत्व क्या होते हैं।
2.क्यों सभी प्रकार के आहारों में से फलों को सबसे ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
3. क्यों दालों को पकाने के पहले पानी में भिगो कर रखना चाहिये।
4.क्यों पिसे गेहूँ को छानने के बाद ही माड़ना चाहिये।
5.अंकुरण (जर्मिनेशन) और किण्वन (फर्मेंटेशन) तथा अन्य पाक विधियाँ विपोषक तत्वों को किस तरह नियंत्रित करते हैं।
पोषक तत्व विपोषक तत्व:
सभी पौधे और उनके उत्पाद, जो हमारे आहार को तैयार करते हैं, में पोषक तत्वों के साथ स्वयं की सुरक्षा हेतु एंटी न्यूट्रीशनल तत्व (पोषण विरोधी तत्व) भी उपस्थित होते हैं जिन्हें इस लेख में विपोषक तत्व कहा जा रहा है, यह पौधे की प्रतिरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।
महत्वपूर्ण विपोषक तत्व और इनकी मात्रा:
इन्हें अनाज, दलहन, तिलहन और मेवों में *फाईटेट्स/फाइटिक एसिड,* दलहन, कच्चा केला, अन्नानास, जामुन, सेब खजूर, चाय और कॉफी में *टैनिन्स,* सोयाबीन सहित अन्य दलहन में *ट्रिप्सिन इन्हिबिटर,* पालक, चौलाई, शकरकंद, चुकंदर, कमरख, अंजीर, कीवी और जामुन में *ऑक्ज़लेट्स* पपीता, अन्नानास और आड़ू में *इंज़ाईम इन्हिबिटर्स* और सेब, आड़ू, आलू बुखारा, खुबानी और चेरी में *सायानोजैनिक ग्लाइकोसाइड्स* और अंगूर, स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी में *पॉलीफिनॉल्स /फ्लेविनॉइड्स* इत्यादि । यह मानव के उपयोग के लिये उपयुक्त नहीं होते।
इनकी मात्रात्मक उपस्थिति घटते हुये क्रम में इस प्रकार है :
1.तिलहन
2.दलहन
3.मोटा अनाज
4.अनाज
5.सब्जियाँ
6.फल
अर्थात विपोषक तत्व सबसे अधिक दालों में और सबसे कम फलों में होते हैं।
विपोषक तत्वों की मात्रा में कमी लाने की विधि:
अच्छी बात यह है कि खाना बनाने की विभिन्न पद्धतियाँ जैसे, पीसने, छीलने, उबालने, ब्लाँच करने, भूनने और सेंकने और किण्वन (खमीर उठाना) से यह तत्व काफी हद तक निष्क्रिय हो कर मनुष्य हेतु सुरक्षित स्तर पर आ जाते हैं।
प्रकृति की भूमिका और विपोषक तत्व:
प्रकृति की व्यवस्था की सुंदरता देखिये, फल के चारों ओर गूदा होता है, जिसे, प्रकृति चाहती है कि हटे ताकि बीज / गुठली बाहर आये और नया पौधा बन सके। इसीलिये, फल में (खासकर गूदे में) विपोषक तत्व कम होते हैं। वहीं, अनाज स्वयं ही बीज हैं जिसे बो कर नया पौधा तैयार किया जा सकता है, अतः फल की तुलना में, अनाज के बाहरी आवरण पर अधिक मात्रा विपोषक तत्व विद्यमान होते हैं ताकि इनका सेवन मनुष्य कम करें।
एक रोचक बात और, कृत्रिम ढंग से पकाये फलों के वनस्पत डाल के पके फलों में विपोषक तत्व कम होते हैं। वहीं, मसालों में भी विपोषक तत्व उपस्थित तो होते हैं किंतु मसालों का उपयोग अत्यंत कम मात्रा में होता है इसलिये, मसालों के माध्यम से जीवों को विपोषक तत्व की मात्रा लगभग न के बराबार ही मिलती है।
बकरी का दूध सर्वश्रेष्ठ:
तत्व दूध में भी होते हैं। इन विपोषक तत्वों की मात्रा तथा कुछ अन्य कारणों से बकरी का दूध सर्वाधिक सुपाच्य माना जाता है फिर गाय का दूध था फिर भैंस का दूध।
आहार के चयन का आधार:
ध्यान रखें कि आहार का चयन सिर्फ इस बात के आधार पर नहीं करना चाहिये कि हमें आहार में कौन-कौन से आवश्यक पौष्टिक तत्वों का सेवन करना है बल्कि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिये कि आहार में कौन-कौन से विपोषक तत्व उपस्थित हैं जो नुकसान पहुँचा सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें की खाना पकाने की उचित विधि का चुनाव कर विपोषक तत्वों की मात्रा को कम कर लें। यह मानव के उपयोग के लिये उपयुक्त नहीं होते बल्कि नुकसान पहुँचाते हैं।
सार:
इस बात का ध्यान देना लाभकारी होगा कि जिन आहारीय घटकों (दलहन, तिलहन, अनाज, मोटा अनाज, सब्ज़ियाँ और फल) में विपोषक तत्व विद्यमान हों उनका सेवन कम करें अथवा स्वयं के पाचन की स्थिति देख कर आहार का चयन करें।
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सादर
प्रियतम अवतार मेहरबाबा की जय जय जिनेंद्र सदा*
लेखन: डॉ.किंजल्क सी.सिंह, डॉ.चंद्रजीत सिंह, सुश्री चंदना ए. सिंह, सुश्री स्वास्तिक सी.सिंह
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Avtar Meher Baba Ki Jai
Dr. Chandrajiit Singh

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