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परसों हेयर ड्रेसर से हुई बातचीत पर आधारित है यह प्रसंग, आशा है आपको पसंद आयेगा, हो सकता है आपको मदद भी करे। बताइयेगा ज़रूर
*सादर*
क्या बात है बहुत दुबले लग रहे हैं ?
पाचन बहुत खराब है सर। डॉक्टर साब को भी दिखाया, खून की जाँच और एंडोस्कोपी भी कराई, इंफैक्शन आया है।
विटामिन-डी की कमी आई क्या? विटामिन- डी की कमी के कारण शरीर में कैल्शियम का अवशोषण नहीं हो पाता है। कैल्शियम की कमी के कारण लिवर फंक्शन प्रभावित होता है और इस कारण पाचन गड़बड़ हो जाता है। विटामिन- बी भी आवश्यक है पाचन के लिये। इसकी कमी से शरीर में हल्का-हल्का दर्द भी होता है।
बिल्कुल सर, जाँच में विटामिन-डी की ही कमी आई है।
सर, एक कमी और बताई है। मैं आपको बताता हूँ रिपोर्ट देखकर। सर, इसमें विटामिन बी-3 की भी कमी बता रहा है।
असल में, वर्षा ऋतु में, बदली के कारण, सीधी धूप (पराबैंगनी किरणें) की कमी के कारण शरीर में विटामिन-डी का निर्माण नहीं हो पाता है, जिसके कारण शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। वहीं कैल्शियम की कमी के कारण आँतों द्वारा विटामिन-डी का अवशोषण भी कम हो जाता है, और पाचन क्रिया में बाधा आती है। इस कारण पाचन गड़बड़ होना, शरीर में भारीपन लगना और गैस बनना यह सब समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सर, मेरे पेट में एक जगह पर दर्द भी हो रहा है।
यह, गैस के कारण होता है, इससे छुटकारे के लिये सुबह पवनमुक्तासन, रात के खाने के बाद, शत्पावली अथवा शत्पदी अर्थात सौ कदम आहिस्ता- आहिस्ता टहलना, वज्रासन और रात को सोने से पहले वामकुक्षी आसन (बाये करवट कर कुछ देर लेटना) करना लाभकारी होता है। ऐसा अभ्यास करने से वात नियंत्रित होता है।
साथ ही हल्का भोजन और उबले पानी का सेवन करना चाहिये। इस विषय में सुजोक थैरेपी भी प्रभावशाली है।
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में इस समस्या की पहचान वात के प्रकुपन के रूप में होती है। जिसे नियंत्रित करने के लिये कड़वा, कैसला और तीखे स्वाद के आहार का सेवन नहीं करें बल्कि मीठे, खट्टे और नमकीन स्वाद वाले आहार का सेवन करें।
सर्वप्रथम आहार फिर औषधि। बदलती जीवन शैली और आहार की स्थित में विशेषज्ञ की राय लेना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इन्हें अपने जीवन में शामिल अवश्य करें।
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जवाब देंहटाएंसादर
प्रियतम अवतार मेहेरबाबा की जय जय जिनेंद्र सदा
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